शिक्षा मे बहुत बड़ी महारत हासिल थी राजेन्द्र बाबू जी को : ऋचा बशिस्ठ

कार्यक्रम के दौरान मंच पर सम्मान के दौरान ऋचा जी व वरिष्ठ भाजपा नेता जी एल शर्मा

गुरग्राम(आशुतोष शर्मा) डॉ राजेंद्र प्रसाद ने लॉ करने से पहले कानून का ज्ञान भी ले लिया था। वह पढ़ाई-लिखाई में इतने होनहार थे कि उनके शिक्षक भी उनकी प्रशंसा करते थकते नहीं थे। एक बार तो एग्जाम कॉपी जांचते दौरान उनकी एग्जाम शीट को देखकर एक्जामिनर ने उसमें यह तक लिख दिया था कि ‘द एक्जामिनी इज बैटर दैन एक्जामिनर’ यानी ‘परीक्षार्थी, परिक्षक से बेहतर है।’उक्त विचार वरिष्ठ समाजसेवी ऋचा बशिस्ठ ने पूर्वाञ्चल एकता मंच के डॉ राजेन्द्र प्रसाद जयंती समारोह के दौरान रखे उन्होने बताया कि डाक्‍टर राजेंद्र प्रसाद (Rajendra Prasad) राष्‍ट्रपिता गांधी से बेहद प्रभावित थे, राजेंद्र प्रसाद को ब्रिटिश प्रशासन ने 1931 के ‘नमक सत्याग्रह’ और 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान जेल में डाल दिया था.
आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत को गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलने के साथ राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने. साल 1957 में वह दोबारा राष्ट्रपति चुने गए. राजेंद्र प्रसाद एकमात्र नेता रहे, जिन्हें 2 बार राष्ट्रपति के लिए चुना गया. 12 साल तक पद पर बने रहने के बाद वे 1962 में राष्ट्रपति पद से हटे.

राजेंद्र प्रसाद की बहन भगवती देवी का निधन 25 जनवरी 1950 को हो गया था. जबकि अगले दिन यानी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने जा रहा था. ऐसे में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भारतीय गणराज्य के स्थापना की रस्म के बाद ही दाह संस्कार में भाग लेने गए.साल 1962 में राष्ट्रपति पद से हट जाने के बाद राजेंद्र प्रसाद को भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया.

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